बुढ़वा मंगल : हनुमान जी का शिक्षक दिवस के साथ कुछ ऐसा है कनेक्‍शन

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तुलसीदास जी ने हनुमान चालीसा की चौपाई का प्रारम्भ करते हुए स्पष्ट किया है कि ज्ञान और गुण के सागर हैं हनुमान। अगर चाहते तो वह ज्ञान और बल के सागर भी लिख सकते थे लेकिन तुलसीबाबा ने ज्ञान और गुणों के सागर लिखा। अंग्रेजी में समझें कि नॉलेज और क्वालिटी साथ में क्वांटिटी (सागर) है। हनुमान जी में ज्ञान और गुणों की अपार मात्रा है इसलिए उनकी ख्याति तीनों लोको में है। यहां हम लोगों के समझना है कि हमारे भीतर ज्ञान और गुणों को भरने वाला गुरु, शिक्षक है।

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर। जय कपीस तिहुं लोक उजागर

एक विशेष बात यह है कि तुलसीदासजी ने रामचरित मानस और हनुमान चालीसा के प्रारंभ में ही गुरु वंदना की है। उन्होंने कहा है कि अगर किसी का गुरु नहीं है तो वह हनुमान जी को अपना गुरु बना सकता है। ईश्वर का साक्षात्कार बिना गुरुकृपा के होना कठिन है। हनुमान जी के सामने पवित्र भाव रखते हुए उन्हें अपना गुरु बनाया जा सकता है। एकमात्र हनुमान जी ही है जिनकी कृपा हम गुरु की तरह प्राप्त कर सकते हैं। तुलसीदास जी ने हनुमान चालीसा का शुभारंभ ही गुरु के चरणों में नमन करते हुए किया है-

श्री गुरु चरन सरोज रज निज मन मुकुरु सुधारि

बरनऊं रघुवर बिमल जसु, जो दायक फल चारि

बुद्धि हीन तनु जानके, सुमिरौ पवन कुमार

बल बुद्धि विद्या देहु मोहि हरहु कलेश विकार

तुलसीबाबा ने हनुमान चालीसा में सभी को बजरंगबली को अपना गुरु बनाने को कहा है।

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